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कछौना कांड: लाठियों की बरसात से सिर हुआ चकनाचूर… CT स्कैन रिपोर्ट देख काँप जाएगी रूह

लाठियों की बरसात से सिर हुआ चकनाचूर… CT स्कैन रिपोर्ट देख काँप जाएगी रूह

#हरदोई: लखनऊ मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में हुआ यह सीटी स्कैन कोई साधारण मेडिकल दस्तावेज़ नहीं, बल्कि एक ज़िंदा इंसान पर टूटे अमानवीय अत्याचार की खामोश चीख है। खोपड़ी की हड्डियों में पड़ी गहरी दरारें, बिखरे फ्रैक्चर और चेहरे की टूटी बनावट साफ़ बता रही है कि सलीम पर लाठियों की बरसात सिर्फ उसे मारने के लिए नहीं, बल्कि उसे कुचल देने के इरादे से की गई थी। यह रिपोर्ट सिर्फ सिर की है …. जबकि शरीर की कई हड्डियाँ चकनाचूर हो गई हैं!

आज सलीम ICU में ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। सिर और चेहरे की कई हड्डियां चूर-चूर हैं, जबड़ा बुरी तरह टूटा हुआ है और दिमाग को गंभीर चोट पहुंची है। मशीनों की बीप-बीप के बीच उसकी हर सांस परिवार के लिए दुआ बन गई है।

ICU के बाहर बैठी उसकी पत्नी, अधिवक्ता फिरदौस जहां, की आंखों में नींद नहीं—सिर्फ़ इंतज़ार है। वही महिला जिसने अदालतों में खड़े होकर न जाने कितनों को न्याय दिलाया, आज अपने ही पति के लिए इंसाफ़ की भीख मांगने को मजबूर है।

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फिरदौस जहां ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और #हरदोई के पुलिस कप्तान से हाथ जोड़कर गुहार लगाई है कि इस जघन्य हमले के मुख्य आरोपी नसीम प्रधान की तत्काल गिरफ्तारी की जाए। उनका कहना है कि जब तक सरगना खुलेआम घूमता रहेगा, तब तक न्याय सिर्फ काग़ज़ों में ही सिमटा रहेगा।

यह हमला किसी क्षणिक गुस्से का नतीजा नहीं, बल्कि दबंगई और सत्ता के नशे में रची गई हिंसा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पीड़ित ICU में है, तो अब तक मुख्य आरोपी सलाखों के पीछे क्यों नहीं है?

CT स्कैन की यह तस्वीर सिस्टम से सवाल पूछ रही है—
क्या कानून सबके लिए बराबर है?
या फिर प्रधान और रसूखदारों के लिए अलग नियम हैं?

यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं है।
यह उस समाज का आईना है, जहां आज भी ताक़तवर लाठी उठाता है और कमज़ोर ICU पहुंच जाता है।

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